अलग अलग जीवों के लिए आक्सीजन भी अलग अलग ही होता है यह मैं धीरे धीरे महसूस कर पाया, बेहतर तरीके से तब जान पाया जब उसके छू लेने भर से अपने भीतर की उदासी को बिलाते देखा, एक कमरे को भरे पूरे घर की तरह महसूस किया।
प्रेमी के लिए उसकी प्रेमिका की उपस्थिति ही प्राणवायु होती है क्या है कहना अनुचित है ?
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नींद फिर वैसी ही आँख मिचौली करने लगी है। रात सपनों से भरी रहती है, कैसे सपने ? यह बेहद निजी बात है, इसे केवल वही जान सकती है।
सुबह से दो अजीबोगरीब घटनाएं हुईं। व्हाट्सएप पर एक अंजान नम्बर से लगातार 4 बार कॉल आया, फोन मुझसे यूँ भी एक बार मे उठता नहीं, सो उठाया नहीं, घण्टे भर बाद मन हुआ कि देखूँ वह अन्जान नम्बर किसका है तो प्रोफ़ाइल पर एक खाकी वर्दी पहने अधेड़ उम्र व्यक्ति की तस्वीर लगी थी, मुझे ढेरों मैसेज भेजे थे, जिसमें मैं किसी से वासना भरी बात कर रहा हूँ ऐसा कुछ मामला था, नीचे एक धमकी भी थी, आपको 2 दिन में हेरासमेन्ट के केस में गिरफ्तार करना है, फोन कीजिए.. मैं देर तक देखता रहा सोचता रहा ऐसी बात तो मैं अपनी प्रेमिका से कभी बहुत निजी क्षण में भी नहीं कहता, न कह पाउँगा। अनन्तः बस ब्लॉक कर दिया। अश्लील और बेईमान लोगों से बोलना भी खुद को वहीं ले जाना है जो सम्भव नहीं।
दूसरी घटना हुई सकारात्मक, आयरलैंड से एक महिला ने मैसेज किया था मेल पर, उसे शब्दशः लिख दे रहा हूँ ;-
" सितंबर की शाम मेरे जन्मदिन के दिन मेरे पति ने मुझे आपकी लिखी एक कविता सुनाई थी, उसे मैं सोचती रही, कि कैसे कोई हमारा मन लिख सकता है, तबसे आपको पढ़ रहीं हूँ। इससे ज्यादा टाइप नहीं कर पाऊंगी.. Pta nahi yah message aapko niji jindagi me jabran ghusana nahi lage, mgar mujhse rha nahi gya, kai dino se apko lgatar padh rhin hun, apko padhkar bhitar sukun miltaa hai,lgata hai yahan se itni door koi hmara man likh rha hai, hum dono aur hamri beti bhi apki dayri padhte hai, hum us par bat krte hai, apko kuch kahna bhi chahti hun, apne andar ki yah bechaini bachaye rakhiyega, yh apki punji hai, meri maa ko upnyas padhne ka shauk tha wo hoti to unhne apka likhaa jarur sunati,
Kuch bura lga ho to maf kijiyega, mujhe nahi pta aap ki umr kya hai fir bhi khub aashirvad aapko , hm sbki ka mn likhte rahiye, aapki maa kitni kismat walin hongi.
Vinita singh '
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इसे जबसे देखा हूँ तबसे कई बार पढ़ रहा हूँ। कुछ शब्दों ने कितना प्रेम दिया है, क्या मैं इसका हकदार हूँ ? मैं तो महादेव से बस एक व्यक्ति की आँख में सबसे विशेष बने रहने का आशीष चाहता हूँ यह इतना प्यार मैं कैसे सम्भालूँगा प्रभु..
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मैसेज से एक और मैसेज की याद आई मगर छोड़िए..
मुझसे ही, हू, हर जगह खीस चियारे खड़ा रहना, किसी को देखते ही तस्वीर खिंचवना, सबको भईया दीदी कहना होगा नहीं, फिर उस ओर जाने का क्या अर्थ.. जब ऐसे मैसेज आते हैं तो मैं सबसे पहले अपने से पूछता हूँ जब पहली बार कुछ लिखा था तो छपने या मंच पर पढ़ने के लिए लिखा था ? भीतर से नकार का स्वर आता है, और मैं भूल जाता हूँ ऐसे भी लोग हैं।
एक पुस्तक प्रकाशक लगातार कह रहें हैं उन चिट्ठियों का संकलन छापने को जो चिट्ठियां पढ़ते हुए रिकॉर्ड हुई हैं, मगर मैं पीछे हट रहा हूं, मन कहता नहीं है कि ऐसा कुछ कर पाया हूँ जो उसे सहेज लूँ, जो जिसके योग्य होगा पहुँच ही जाएगा।
पढ़ नहीं पा रहा हूँ। वैसे जैसे पढ़ना चाहता हूँ। मगर पढ़ूँगा।
इन दिनों एक स्मृति घेरे रहती है, मन करता है वहीं भाग जाऊँ फिर मन को समझाता हूँ, अभी नहीं , अभी नहीं..
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सबसे मुश्किल है अकेले भोजन करना, उससे भी मुश्किल है अपने लिए बनाना, यह कैसे होता है ? मुझे मौत आती है अकेले खाते। महीने बीत जाते हैं इंतज़ार करते की सब साथ होंगे तो कुछ बनाऊंगा, कई बार तो ऐसा होता है चलो आज बनाते हैं, कुछ घड़ी किचन में खड़ा रहता हूँ, सामान देखता रहता हूँ, मन अपनों को ख़ोजता है, भीतर ही भीतर बुलाता हूँ, कोई आवाज़ नहीं आती तो चुप कुछ ऐसा बना लेता हूँ जिससे पेट भर जाए और लौट आता हूं। कल दिनों बाद कुछ जीभ का सोचकर बनाया, बनाते हुए भीतर अजीब सा हो रहा था, मन होता है मैं कुछ भी अच्छा खाऊं या अच्छा देखूँ तो उसे पहले तुम खाओ तुम देखो, मुझे स्वाद ही नहीं आता अकेले, न किसी जगह पर जाकर आँखों को सुख मिलता है। भीतर कुछ भीतर ही भीतर चलता रहता है क्या है वह पता नहीं। मैं जानता हूँ मेरे अपनों की ख़ुशी मुझे ख़ुश देखने में है, मगर अकेले ख़ुश कैसे रहा जाता है ? कोई इसे मूर्खता कह सकता है, कोई कहे इससे पहले मैं मानता हूँ मैं मूर्ख ही हूँ।
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सुबह से एक गज़ल गुनगुना रहा था, मगर अब वह धुन भूल गई, सोचा था अभी पन्ने पर बाद में लिखूंगा मन भर महसूस लूँ, अब.. , मुझसे हर चीज़ छूट क्यूँ जाती है
यह तीसरा पन्ना है.. मैं भी छोड़ देता हूँ अब चौथे को.. याद करे मुझे वो भी अब कल तक.. कोई तो याद करे..
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― आशुतोष प्रसिद्ध
शाम 6: 10 / 11 जनवरी 2025
Sundar 🎶
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया 👏🏼👌
जवाब देंहटाएं♥️♥️✨
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