सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

batein लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

छू रहा हूँ तुझे और पिघल रहा हूँ मैं

किसी से बात कर रहा होता हूँ तो उसकी बात का कोई एक सिरा मेरे मस्तिष्क में गड़ी हुई अनगिनत खूटियों में से किसी एक खूँटी में फँसता है फिर वह तब तक उधड़ता रहता है जब तक उस बात में एक भी रेशा बचता है। कई बार बातों के ऐसे हिस्से फँस जाते हैं जिससे मैं किसी व्यक्ति के पूरे व्यक्तित्व उसकी विचारधारा, वह आगे कैसे रहेगा, किन किन बातों पर कैसे प्रतिक्रिया देगा उसकी जीवन शैली और विचार से जुड़ा एक एक रेशा खोल लेता हूँ। मैं जान जाता हूँ आगे कब और किस बात पर यहाँ से मुझे रिश्ता समेट लेना पड़ेगा। संवाद बड़ी सुंदर और छली किस्म की रीति है जो आदमियों ने आदमियों को जानने के लिए शुरू किया।  ***************  उस हाथ का स्वाद दुनिया के सभी हाथों से ज्यादा मन को भाता है जिन हाथों से प्रेम होता है। इन दिनों न जाने क्यूँ मुझे गाड़ी चलाते, कुछ करते, यहाँ तक की चुपचाप बैठे रहने के दौरान भी अचानक से तुम्हारे हाथ का स्वाद मन में उतर आता है। फिर मुझपर एक अजीब किस्म की रुमानियत छा जाती है। जब जब सुनता हूँ तुम कुछ बना रही हो, मैं कल्पना कर लेता हूँ तुम कैसे खड़ी होगी रसोई में, तुम्हारे छोटे हाथ कैसे चल रह...