सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

birthday लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

फिर वही रात है

आज मेरा जन्मदिन था। लगभग और दिनों की तरह ही बीता , कुछ प्रिय जनों ने विशेष महसूस करवाया। विशेष होने की अनुभूति से बचते हुए भी विशेष होने की अनुभूति घेर ही लेती है। यह अनुभूति भीतर अजीब सी चुभन पैदा करती है तब और ज्यादा जब आप जानते हों कि आपने साल दर साल असफलता की एक ऊँची इमारत खड़ी करने के अलावा कुछ विशेष नहीं किया है। सुबह से कई सारे फोन आए कुछ उठा सका कुछ नहीं। सैकड़ों मैसेज, और स्टोरीज के जवाब अब भी बचे हुए हैं। सबने याद रखा। सबने प्यार दिया। फिर भी पूरा दिन एक अजीब-सी खाली जगह बनी रही, जैसे कोई मेरे सीने में बड़ा-सा छेद कर गया हो और उसे कोई देख ही न पाए। सुबह देर से सोकर उठा, लगभग दोपहर में, फिर और सो गया तो चार बज गए, दिन बिल्कुल सुखद रहा, दिनों बाद सुख की नींद नसीब हुई। शाम को रोहित लोग आए तो बाहर गया, सब किताबें लेकर आए थे, मैं उन सबका प्यार देख भावुक हो गया, अभी सब बेरोजगार हैं और इतना प्रेम..मैं कुछ नहीं कर सका आजतक उन लोगों के लिए।  केक कट किया गया, तस्वीरे ली गईं, हँसी हुई और फिर सब अपनी अपनी दुनिया में। अब कमरे में मैं अकेला बैठा हूँ। केक का आधा हिस्सा फ्रिज में पड़ा है...