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कुछ विशेष नहीं। दौड़भाग भरा दिन। ऊब । थकन हावी है। परिवार के लगभग सब बीमारी में हैं। मैं हर तरफ भाग रहा हूँ कहीं भी नहीं पहुँच रहा।  सुकून का कोई एक कोना नहीं। किससे कहूँ मुझे छिपा लो। मैं थक गया हूँ। मैं इस जीवन से थक गया हूँ।  शायद नींद आ जाए। महादेव से एक ही विनती है या तो सब सामान्य कर दें या उठा ही लें।  ― 15 मार्च 2025 / 8:30 शाम