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कोई कहीं से पुकारे मुझे

मुझे न जाने क्यूँ किस बात पर क्रोध आ जाता है मैं जान ही नहीं पाता। यह सुनने में कितना अजीब है मगर सच है। सच बताऊं तो मैं समझ नहीं पाता मैं क्रोध में होता हूँ या दुःख में. पर यह अचानक होता है मैं अपने को बेकार से महसूस करता हूँ। क्यूँ ? पता नहीं ।  ********** परिवार में सब खुशहाल हैं, जो जहाँ हैं अपने ढंग से संक्रांति मना रहें हैं, कोई सरयू में नहा रहा है कोई नर्मदा में तो कोई कई नदियों में एक साथ, सबके चेहरों पर प्रसन्नता है। मन उल्लास से भरा है।  कोई चूड़ा दही खा रहा है कोई उड़द की खिचड़ी, मैं हर जगह थोड़ा थोड़ा हूँ और कहीं नहीं हूँ। त्योहार बड़े जरूरी हैं रुचियाँ स्पष्ट होती हैं, मन खुलता है।  ********* कहीं होते हुए कहीं और होने की इच्छा हमें कहीं का नहीं रहने देती।  ********* हम कुछ लोगों के सपने में आते हैं, और कुछ लोगों का कोई सपना हमारे बिना पूरा नहीं होता, जीवन में ऐसे लोगों के पास रहिए जिनके सपने आपके बिना पूरे न होते हों।  ********* मैं कुछ दिनों के लिए पहाड़ पर रहना चाहता हूँ, यहाँ की सभी सुख सुविधाओं को छोड़कर दो जोड़ी धोती पेटभरने भर के अनाज, कुछ...