क्या तुम नहीं कहोगी कि तुम्हारी बाहों को मन है मुझे कस लेने का ? तुम्हारे होंठ फड़क रहें हैं मेरी त्वचा का स्वाद ले लेने को.. तुम क्यूँ नहीं कह रही हो कि तुम्हारे स्तनों में हो आया है कसाव वैसे जैसे माओं को हो आता अपने भूखे बच्चे की आँख देखकर,मैं तुम्हारा ही जन्मा तो हूँ न ? अच्छा तुम्हारे पेट में भी उड़ रहीं हैं तितलियां न ? क्योंकि तुम जानती हो मेरी पसंदीदा जगह है वह। क्या तुम्हारे पाँवों का मन नहीं कि मैं उन्हें अपने उन्हीं होठों से स्पर्श करूँ जिनसे तुम्हारा नाम तक उचारते काँपते हैं मेरे होंठ.? क्या तुम्हारे जीवनद्वार पर नहीं हो रही है मेरी प्रतीक्षा ?कहो न मेरी रतिसाथी, कहो ! कि तुम्हारी उंगलियां ऐंठी जा रहीं हैं मेरे बालों में चलने को उन्हें भींच कर अपने भीतर भर लेने को.. कहो न तुम्हें आ रहा है प्यार! वैसे जैसे मरने वाले को आ रही होती है मौत.... इस दुनियावी चिंता का बोझ झटक देने के लिए जरूरी है कि मैं और तुम हो जाएं हम, और मर जाएँ एक दूसरे में, पा लें वह सुख जिसपर हमारा अधिकार है। अन्यथा सांसारिक मौत हमें अलग कर देगी.. हम तुमसे अलग नहीं होना चाहता। मेरे पास तुम्हारे साथ...