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सुंदर कोमल सपनों की बारात गुज़र गई जानाँ

आसपास अजीब सा माहौल है। लोग फिर से तैयारी में जुटे हैं, जिनके घर बच्चे हैं उनका उत्साह देखते बन रहा है, घरों पर नई जगमग लाइट लग गईं हैं, बाज़ार अपने साज सामान के साथ फिर तैयार हो गया है। लोग नए साल में जाने से पहले मन भर लूटेंगे। कई सवाल हैं, मगर करूँगा नहीं, उनका जवाब जानता हूँ, उस सवाल के बाद मेरी सोच पर उठे सवालों को भी जानता हूँ। जब उत्सव सा माहौल होता है, मुझे घर की बड़ी याद आती है..घर वो नहीं जो चार दीवारों का है, घर वो जो मुझे घर सा लगता है उसके बिना कुछ देखने का ही नहीं मन करता, न अच्छा ही लगता है, कल कैसे बीतेगा.. बीत जाएगा। बीता दिया जाएगा।  ********** चोट लगने से जो घाव हुए थे वो भर रहें हैं। चोट लगने के दौरान जितनी असहजता नहीं हुई उससे ज्यादा अब हो रही है। घाव जब भरने लगते हैं तो उनमें इतनी कलबलाहट क्यूँ होती है ? दुविधा यह है कि हम उसे कुरेध भी नहीं सकते। धैर्य बड़ी मुश्किल सी बात है । ********** आज विद्यापति को पढ़ रहा था, बहुत कुछ नहीं तो इतना तो कहा ही जा सकता है कि शुद्ध रसिक आदमी थे। उन्हें कलावादी कहना कहाँ तक उचित है मुझे नहीं समझ आता ? अगर है भी तो ऐसी कला से कला क...

मुझे माफ़ करना समय !!

जितना सुख मन का कह देने में है उससे कहीं अधिक सुख मन को दबा लेने में है। तत्कालिक रूप से कह देना भले ही सुखद हो,पर दीर्घ कालिक रूप से मन का मन में ही दबा लेना सुखद है। सुखद यूं है कि हमारे मन की पीड़ा से कोई और पीड़ित नहीं होता। खुद की पीड़ा से दूसरे को भर देना कहां तक उचित है? मुझे यह उचित नहीं लगता। लेकिन यहीं एक सवाल भी उठता है कि ऐसा है तो फिर रिश्ते के मायने क्या हैं? जब मन का मन में ही रखना सुखद है तो क्यूं कहना किसी से कुछ, यह सुख ऐसे ही भोगा जाए बिना कहे, पर नहीं ! भोग भी तो अकेले का प्रयोजन नहीं है,कहना जरूरी ही है,और कहना ही एक मात्र विकल्प जिससे समझ आए, क्यूं नही कहना है।  कुछ नहीं कहना भी कुछ कहना है, यह जानकारी कुछ कहकर नहीं मिल सकती है। बहुत दिनों से डायरी से दूरी सी हो गयी है, ऐसा नहीं है की लिखता नहीं हूं, लिखता हूं, पर बस वही जो अति वैयक्तिक है उसके लिए... उसके लिए लिख देने भर से ही लगता है कुछ अच्छा रच दिया, लिखने की भूख कुछ क्षण को शांत हो जाती है। फिर जब लिखने की भूख जगती तो कलम उठाने का मन नहीं करता। दोहराव का डर लगता है। पर मजबूर होकर उठाता भी हूं तो उसकी ही ...