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दिन-विषयक

सोना ने बछड़े को जन्म दिया है, घर में सब ऐसे ख़ुश हैं जैसे नाती आ गया है। हिन्दू परिवारों की यह अच्छी आदत है वो अपने आसपास जन्में हर नवजात से अपनी औलाद सा स्नेह करते हैं। आज अंदर से अच्छा महसूस होता रहा दिन भर, पिछले कुछ वर्ष से मैं जब ख़ुश होता हूँ या दुःखी मुझे एक ही शख़्स याद आता है, कुत्ते के बच्चों, और किताबों में उलझा हुआ।मेरा घर..! सुबह दो दिन बाद आज सुबह सी लगी, जीवन कुछ चेहरों को देख भर लेने से कितना जीवन की तरह लगने लगता है। सब तकलीफ भूल जाती है।  एक उम्मीद थी मगर मेरी उम्मीद तो टूटनी ही होती है सो टूट गयी। मुझे मन के समय पर कुछ नहीं मिलता। बाद मेरा मन मर जाता है तब उसके होने न होने का मुझे कोई असर नहीं होता। फिर जब कोई पूछता है ख़ुश क्यूँ नहीं होते आप..मैं नहीं कह पाता, यह इच्छा मेरे भीतर उत्कर्ष तक जाकर सूख गयी है। आज भी वही हुआ।   एक शेर कल रात से ही गुनगुना रहा हूँ न जाने किस शायर का है ;  " दिल में हर लहज़ा है सिर्फ़ एक ख़याल तुझ से किस दर्जा मोहब्बत है मुझे"  शायद मीराजी की किसी ग़ज़ल का शेर है ऐसा मखमली लहज़ा उन्हीं क...