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भावना की समझ और समझ की भावना

किसी से कितनी बात करके कहा जा सकता है फलां व्यक्ति को मैं समझ गया हूँ ? या कितनी बात करके यह तय किया जा सकता है की फलाँ व्यक्ति के साथ जीवन के बचे दिन गुजारे जा सकते हैं ? कोई ठीक ठीक मानक हो तो मैं उस मानक में ख़ुद को मापना चाहता हूँ, मैं देखना चाहता हूँ कि मैं किसी के साथ रहने योग्य हूँ या नहीं, मुझमें वह योग्यता है की नहीं जो किसी के साथ रहने के लिए चाहिए होती है। सवाल यह भी तो उठता है , जीवन के तमाम प्रश्न हैं, तमाम अनुभव, किस अनुभव और कितने प्रश्न से जाना जा सकता है ठीक ठीक, और पक्का होया जा सकता है कि नहीं यह व्यक्ति हमारे लिए सही है। मैं एक ही मुद्दे पर किसी के लिए सही हूँ , किसी के लिए बिल्कुल ग़लत। मेरे स्वभाव से कुछ लोग अत्यंत ख़ुश हैं वो जब जब मिलते हैं कहते हैं, आपसा होना मुश्किल है, आपको रिश्तों की कद्र आती है, आप भावनाओं को समझते हैं, कुछ मिलते हैं तो उनको मुझमें इस समाज में रहने योग्य व्यक्ति नहीं दिखता है, उनके अनुसार भावुकता और सुचिता के साथ रहने वालों का समय गया, कुछ लोग मुझे मध्यम मार्ग पर चलने की सलाह देते हैं। मैं किसी किसी क्षण इतना दिशाभ्रम हो जाता हूँ क...