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मेरे वियोगी

आज महादेव के विवाह का दिन था। आज ही के दिन उनका प्रेम जीत गया था। महादेव से सुंदर कौन प्रेमी होगा। वो खुद को आरोपित नहीं करते, पार्वती के जीवन का अतिक्रमण नहीं करते। उनका जीवन गहन अंधकार में ज्योति का जीवन है। त्याग का जीवन है। प्रकृति के पूजक है, वहीं रहते हैं। जिनका कोई घर नहीं । खंडित को मंडित करते हैं महादेव। विष पीकर सुंदर बोलते हैं। उनमें पति होने का अधिकार कम है साथी और प्रेमी सा साथ खड़े होने वाला स्वभाव अधिक है। वो वियोगी हैं। रोते हैं। अपनी पत्नी के प्रति ईमानदार हैं।  इस परंपरा को ध्यान से देखे तो सर्वत्र प्रेम की जीत की ही कथा है। प्रेम की ही स्थापना है। ईश्वर प्रेम के लिए लड़ते हैं।  अजीब यह है अब सब इतना विकृत हुआ है कि प्रेम करना ही गुनाह है। प्रेमी के लिए तड़पना मजाक की बात है। जाहिर करना तो इतना शर्मनाक है कि आप भरे समाज हाथ पकड़ लें तो लोगों की आँख तन जाती है। यह काश खत्म होता। दुनिया प्रेम से भर जाती। हर आदमी महादेव हो जाए हर स्त्री पार्वती। विवाह के नाम पर जो भी डर पैदा होता है वह खत्म हो, दोनों लिंगो में साथी मिलने का उत्स हो, लोग ईमानदार हों। कामन...