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कह देने भर के लिए न कहते हुए..

इन दिनों सब कुछ उन दिनों से बिल्कुल अलग है जिन दिनों हम इन दिनों के विषय में सोचते हुए कहते थे साधन जीवन आसान करेंगे। साधन ने जीवन मुश्किल किया, छिपने के और रास्ते दिए, चोरी के कई कई तरीके, मारने के अनगिन हथियार ऐसे हथियार जो पैने नहीं होते, जो काटते नहीं कुचलते हैं या पीस देते हैं। धोखे बाजी के विकल्प ही विकल्प हैं। इन दिनों कुछ भी गम्भीर नहीं, यह सबसे गम्भीर विषय है।  इन दिनों संवेदनशील शब्द सबसे अधिक असंवेदनशील लोग उपयोग करते हैं। इन दिनों भाषा फूल की पंखुड़ी की तरह नहीं भाले की नोक की तरह चूभते हैं। इन दिनों सबसे कु-कर्मी वही हैं जिन्होंने सुकर्म के पाठ लिखे।  इन्हीं दिनों मैं हर रोज सोचता हूँ शब्दों का साथ छोड़ दूं, और हर रोज कुछ ऐसा घटता है कि शब्द स्वतः झरने लगते हैं मुझसे जैसे जबरन झिंझोड़ने से गिरते हैं पेड़ से कचे पके सारे फल  मैं धीरे धीरे द्वंदों को सुलझा रहा हूँ और उन प्रश्नों के उत्तर की तरफ जा रहा हूँ जो मैं लगभग 20 दिनों से तलाश रहा था। सच बेहद सीधा होता है, चुप्पी या एक भी अतिरिक्त शब्द से सच झूठ हो जाता है। हमें सबसे नहीं बस उस एक व्यक्ति से सच क...

दिन गिने जाते थे इस दिन के लिए

चुप होने से पहले हम बहुत बोल रहे होते हैं। हम अचानक से चुप नहीं होते हैं, एक प्रक्रिया के तहत धीरे धीरे किस्तों में चुप होते हैं। कभी अनसुना किए जाने से, कभी अपने बोले को बेअसर होते देखने से और कभी कभी अपने बौद्धिक दबाव से.. यह सब बहुत मध्यम गति से होता है, जब तक हमें आभास होता है तब तक वह हमारी पहचान बन चुका होता है। हम गढ़े जाते हैं किसी और के मन और बुद्धि के साँचे अनुरूप, हमें चुनने की आज़ादी नहीं होती, हमारे लिए जो चुना जाता है उसे ही हमारी आज़ादी कहकर हमें पकड़ा दिया जाता है। हम किसी को मन भर गले नहीं लगा सकते, उसे चूम नहीं सकते क्योंकि हमें वह सुचिता से जोड़कर बताया गया, जबकि हम बने ही दो देहों के मिलन से हैं। हमें बहुत सामान्य सामान्य सी बातों को भी इतना आदर्शीकरण करके बताया जाता है कि जब हमें ऐसा कुछ जीने को मिलता है तो हम अपने दिल और दिमाग के द्वंद्व से ही थक जाते हैं और उसे धकिया देते हैं जिसे समेट लेना चाहिए था। दर'असल यह परवरिश की खामी है। हमें जिन्हें खोलकर रखना चाहिए हम उसे ढंककर रखते हैं जो खुला रखना था वह ढंककर। कह देने पर यह बात स्वीकार नहीं की जाती है। जैसे मैं नहीं स्...