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स्वसंवाद

सुंदर सपने को एक बार और देख लेने की चाहत बड़ी अजीब होती है। हम उस मोह में टूटी नींद के बाद फिर नींद लाने का लाख जतन करते हैं पर आती नहीं। आ भी जाती है तो वह सपना नहीं आता जिसके लिए नींद को मनाया जा रहा होता है। एक बार उठा, फिर लेट गया। सुबह देर तक बिस्तर में पड़ा रहा, मगर... टूटे हुए सपने और भविष्य के नाम टाल दी गयी योजनाएं बड़े किस्मत वालों की ही पूरी होतीं हैं। हर दिन की अपनी मजबूरी होती है, और हर नए दिन की अलग आवश्यकता, अलग इच्छा है। प्रयास करो चीजें टालो नहीं, जब जो मन करे जी लो..'अगले पल' जैसे शब्द के चक्कर में मत जिओ।  *********** मन कुछ अनमना सा था थोड़ी देर प्रश्नों से जूझता रहा फिर लगा खोपड़ी आँख से टपक जाएगी तो सब समेट कर लेट गया। थोड़ी देर लेटने के बाद बाबा की एक बात याद आयी और उठ बैठा, वो जो बात याद आई वो बात वही थी जो सबके बाबा या पिताजी सबको कहते हैं। अरे भई वही 'दिन में सोना बीमारी का घर' , उठा तो इधर उधर कुछ घड़ी चलता रहा, फिर मन में आया, बिखरी चीजों को सही कर देते हैं। शुरू हुआ तो पहले पहल हर कोने से, बिस्तर के नीचे से सिक्के निकले उन्हें गुल्लक में भरा, पापा ...