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बे-कायदे की बात कुछ कायदे से

कल का बुखार आज बासी हो गया है। कल दिन में घण्टों दवा के बोझ में अर्धनिद्रा में था। तो रात बमुश्किल नींद आयी थी। लगभग सुबह के पहर। जैसे नींद के द्वार तक गया लगा कोई पहरा दे रहा है। मैं बाहर खड़ा भीतर ताकने की कोशिश करता रहा। नींद की खोज में नींद नहीं सपने आए। सपने में दो साँढ़ आपस में भयंकर लड़ रहे थे। मैं उन्हें छुड़ाने के प्रयास कर रहा हूँ। एक काला है एक सफेद। कभी एक भारी पड़ता है कभी दूसरा। घर के सारे कुत्ते आसपास भौंक रहें हैं। साँढ़ के खुरों से धूल ही धूल उड़ रही थी। मेरा हृदय एकदम डरा हुआ था। गला सूख रहा था कहीं कोई मर न जाए। किसी किसी क्षण तो लगता अभी मेरे ऊपर ही आ जाएंगे। कुत्ते जब ज्यादा परेशान करने लगते तो वो भागते और जहाँ रुक पाते वहीं फिर लड़ने लगते। ऐसा पहली बार हुआ। जब मैं सपने में साँढों की ऐसी लड़ाई देख रहा था। नेपथ्य में तुम कहीं के लिए तैयार हो रही थी। मुझे बार बार पुकार रही थी चलो अब बहुत देर हो गयी है पहले ही.. उन्हें लड़ने दो। छोड़ देंगे थोड़ी देर में। मैं जैसे हटने का सोचता यह और भयंकर होने लगता। अनन्तः बड़ी दीदी आईं मुझे खींचकर ले गईं चलो यहाँ से नहीं तो इनकी लड़ाई में चोट तुम्...

मन दिमाग से नहीं चलता और न दिमाग मन से

दिमागी समझाइश पर इच्छाओं का भार इतना हो जाता है कि मन सारी सूझ बूझ सारी रोका टोकी भूल जाता है और मन उसी तरफ भागता है। वह फैंटसी नहीं है। वह वास्तविक जीवन है। जहाँ से फैंटसी का अर्थ है। रात बमुश्किल नींद आई। नींद आई तो सपने में अनगिनत साँप ने घेर लिया। तुम चीखती चिल्लाती रही। मुझे खींचती रही। मैं बचने का कोई जतन नहीं कर रहा है। मैं तुम्हारे भीतर अपने लिए प्रेम देखकर स्थिर हो गया था। मेरे भीतर से साँपों का डर चला गया था। अनन्तः तुम मुझे बचा ले गयी। साँप जैसे अचानक चलती राह में आए थे वैसे ही गायब हो गए। सब ख़ूब मोटे मोटे और खतरनाक थे। पर किसी ने काटा नहीं बस डराया, मैं डरा भी। तुममें अदम्य साहस है।  नींद खुल गयी। फिर घण्टे भर बिस्तर पर करवट बदलता रहा। फोन में कुछ तस्वीर देखी जो मन को तरल कर गए। एक चिट्ठी लिखी। भेजने की हिम्मत नहीं हुई। नहीं भेजा। 4 बजे बिस्तर छोड़ दिया। कुछ देर बालकनी में बैठा रहा। मच्छर टूट पड़े तो फिर लौट आया फ्रेश हुआ और किताब लेकर बैठ गया। 'टेबल लैम्प' पढ़कर खत्म किया। गीत चतुर्वेदी के गद्य में एक भीतरी लय है। जो और कम मिलती है। उनकी गद्य भाषा इतनी सरल...