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संदेश

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आँसुओं की आवाज़

रौशनी की खूब व्यवस्था है, विकल्प ही विकल्प है, सूरज से ही काम नहीं चलाना है फिर भी अंधकार का साम्राज्य बढ़ता जा रहा है। इतनी किताबें, इतने नीतिपरक वचन, इतनी महनीय आत्माओं के संदेश उनका बलिदान आस्था के नाम पर ठगे जा रहे लोगों में रौशनी नहीं कर पा रहीं हैं। शासन प्रशासन या और सारे पुलिस बल भी लोगों की मदद बिना बेकार हैं। और लोग हैं कि उन्हें कुछ दिखता ही नहीं, उन्हें मरने की उत्सुकता है, आस्था का अहंकार है, सनातनी होने दिखावा करना है। कर्म लगभग के अच्छे नहीं हैं, हर दूसरा आदमी तीसरे को नोच लेना चाह रहा है लेकिन सबको लगता है यह सब पाप गन्दी मानसिकता गंगा धो देगी। वो कभी नहीं धोएगी। ऐसी आस्था, आस्था कम मूर्खता ज्यादा है जो लोगो हो तर्कहीन कर दे।  सोचने विचारने की क्षमता सोख ले। ऐसे मति वालों के लिए कुछ नहीं किया जा सकता है, उनके लिए कुछ भी कर लो सब बेकार है, संत समाज भ्रष्टों से भर गया, वह अनर्गल प्रलाप करता है। अशिक्षित लोगों में रोष पैदा करता है, जिसके लिए करना चाहिए उसके लिए नहीं करता कुछ, वह चाहता है कि लोग उनके चरण वंदन करें, मूल बात से दूर रहें।  सरकार तो हमेशा से ऐसे मामलों ...

कोई कहीं से पुकारे मुझे

मुझे न जाने क्यूँ किस बात पर क्रोध आ जाता है मैं जान ही नहीं पाता। यह सुनने में कितना अजीब है मगर सच है। सच बताऊं तो मैं समझ नहीं पाता मैं क्रोध में होता हूँ या दुःख में. पर यह अचानक होता है मैं अपने को बेकार से महसूस करता हूँ। क्यूँ ? पता नहीं ।  ********** परिवार में सब खुशहाल हैं, जो जहाँ हैं अपने ढंग से संक्रांति मना रहें हैं, कोई सरयू में नहा रहा है कोई नर्मदा में तो कोई कई नदियों में एक साथ, सबके चेहरों पर प्रसन्नता है। मन उल्लास से भरा है।  कोई चूड़ा दही खा रहा है कोई उड़द की खिचड़ी, मैं हर जगह थोड़ा थोड़ा हूँ और कहीं नहीं हूँ। त्योहार बड़े जरूरी हैं रुचियाँ स्पष्ट होती हैं, मन खुलता है।  ********* कहीं होते हुए कहीं और होने की इच्छा हमें कहीं का नहीं रहने देती।  ********* हम कुछ लोगों के सपने में आते हैं, और कुछ लोगों का कोई सपना हमारे बिना पूरा नहीं होता, जीवन में ऐसे लोगों के पास रहिए जिनके सपने आपके बिना पूरे न होते हों।  ********* मैं कुछ दिनों के लिए पहाड़ पर रहना चाहता हूँ, यहाँ की सभी सुख सुविधाओं को छोड़कर दो जोड़ी धोती पेटभरने भर के अनाज, कुछ...