मैं अपना सब लूटा देने के बाद भी नहीं चाहता हूँ कि कोई मेरे लिए कुछ करे, जब कोई कुछ कर देता है तो भीतर अजीब सा कुछ होता है लगता है मेरा दिल बैठा जा रहा है। मुझे अपने आसपास के हर व्यक्ति के लिए बस करना पसंद है। उनसे मुझे बदले में कुछ नहीं चाहिए। दर'असल मैं स्वीकार नहीं कर पाता की कोई मेरे लिए भी सोच सकता है। पिछले कई महीनों से मैं अपने को देख रहा हूँ जब भी कोई कुछ मेरे लिए कर देता है मैं चिड़चिड़ा हो जाता हूँ, मैं समझ ही नहीं पाता इसे कैसे स्वीकार करूँ.. जबकि ऐसा नहीं है कि मुझे चाहिए नहीं वह, प्रेम भला किसे नहीं चाहिए। यह किस चीज़ का अ-स्वीकार है यह मैं नहीं जानता, सम्भवतः यह ख़ुद का ही नकार है, मैंने वर्षों तक अपना मन दबाया अपने को हर जगह पीछे रखा अब जब कोई कुछ करता है तो मन स्वीकार ही नहीं पाता। यह पहले ही मैं कहीं कह चुका हूँ कि प्रेम तर्क का नहीं स्वीकार्यता का विषय है, मगर स्वीकार्यता त्वरित नहीं आती, वह चरणों में आती है, पूर्ण स्वीकार्यता प्राप्त करने के लिए पूर्ण नकार तक जाना पड़ता है। मैं कहाँ हूँ पता नहीं..
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आज दिन यात्रा में गुजरा उसका शहर छोड़ रहा था तो लग रहा था जैसे ये कार टिखटी है इसके चारों पहिए वो चार लोग जो एक दिन मुझे कन्धा देंगे। गाँव पहुँचते पहुँचते रात हो गई थी। घर मैं नहीं कह पाता.. मेरा कहीं घर नहीं है, मैं हर जगह कोई और हूँ । क्या हूँ पता नहीं.. कभी होगा घर.. यह वही जगह है जो मेरी माँ और पिताजी का घर है। मेरा घर तो ...
निर्भरता अभिशाप है यह निर्भर होने के बाद समझ आता है, यह बात बोलने के बाद आज उसने जो जवाब दिया वो इस पूरी सदी की स्त्रीयों का जवाब था। मैंने स्वीकार किया। इस पाप का दोषी मैं भी उतना ही हूँ जितना मेरे पुरखे..
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दिनभर अलग अलग विचारों के पहिए पर चलता रहा, अब जब ठहरा हूँ तो भीतर की गति रुक ही नहीं रही है। यह सब कुछ वह सब कुछ नहीं है जो चाहता हूँ।
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कई बार वर्तमान की कोई बात कोई प्रतिक्रिया भविष्य के जीवन का संकेत बनती है, उसे पकड़े रहना चाहिए।
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हम उम्मीद करते नहीं है उम्मीद हमसे उम्मीद करती है कि हम उसका पेट भरेंगे इस सिलसिले में हम अपने को थोड़ा थोड़ा तोड़कर उसे खिलाते रहते हैं और एक दिन खत्म हो जाते हैं मगर उम्मीद का पेट नहीं भरता।
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नींद आ जाना आज .. मैं बहुत थक गया हूँ। मैं तुम्हारे भरोसे हूँ, मेरे पास न माँ हैं अभी न बीबी ही हैं कि उनकी गोंद में तुम्हें जीभ दिखाकर सो लूँ , तो तुमसे विनती कर रहा हूँ, मेरी गलतियाँ माफ़ करना, मुझे आराम करने देना।
10 : 30 रात / 17 जनवरी 2025
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