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अरमानो के चंचल धारे ऐसे बहेंगे यहाँ

क्या तुम नहीं कहोगी कि तुम्हारी बाहों को मन है मुझे कस लेने का ? तुम्हारे होंठ फड़क रहें हैं मेरी त्वचा का स्वाद ले लेने को.. तुम क्यूँ नहीं कह रही हो कि तुम्हारे स्तनों में हो आया है कसाव वैसे जैसे माओं को हो आता अपने भूखे बच्चे की आँख देखकर,मैं तुम्हारा ही जन्मा तो हूँ न ? अच्छा तुम्हारे पेट में भी उड़ रहीं हैं तितलियां न ? क्योंकि तुम जानती हो मेरी पसंदीदा जगह है वह। क्या तुम्हारे पाँवों का मन नहीं कि मैं उन्हें अपने उन्हीं होठों से स्पर्श करूँ जिनसे तुम्हारा नाम तक उचारते काँपते हैं मेरे होंठ.? क्या तुम्हारे जीवनद्वार पर नहीं हो रही है मेरी प्रतीक्षा ?कहो न मेरी रतिसाथी, कहो ! कि तुम्हारी उंगलियां ऐंठी जा रहीं हैं मेरे बालों में चलने को उन्हें भींच कर अपने भीतर भर लेने को.. कहो न तुम्हें आ रहा है प्यार! वैसे जैसे मरने वाले को आ रही होती है मौत.... इस दुनियावी चिंता का बोझ झटक देने के लिए जरूरी है कि मैं और तुम हो जाएं हम, और मर जाएँ एक दूसरे में, पा लें वह सुख जिसपर हमारा अधिकार है। अन्यथा सांसारिक मौत हमें अलग कर देगी.. हम तुमसे अलग नहीं होना चाहता। मेरे पास तुम्हारे साथ रहने के कोई तर्क नहीं हैं, न मेरी आवाज़ में इतना सामर्थ्य की तुम्हें पुकार लूँ और तुम दौड़ पड़ो.. काश ! तुम आज भी कहती कि ' कभी कभी बिल्कुल रहा ही नहीं जाता मन होता कैसे बस तुम्हें देख लूँ ' और मैं उस वाक्य को पढ़कर उसे बार बार छूकर अपने इस अकेले के जीवन को लात मार दूँ.. तेज से चिल्लाकर कह सकूँ मुझे प्रेम करने वाली है, नहीं है मेरा जन्म व्यर्थ, नहीं पैदा हुआ हूँ सिर्फ कमाने और खाने के लिए। तुम जानती हो... तुम ही जान सकती हो वह जो मैं इन शब्दों को लिखने पर महसूस रहा हूँ। इसी एक क्षण में मैं तुमसे नाराज़ भी हूँ और तुम्हारे लिए प्रेम से भरा हुआ भी तुम मिल जाओगी तो सब भूल जाऊँगा बस रोऊंगा.. रोऊंगा क्योंकि मैं बहुत खुश होऊँगा। मैं कभी तो बहुत खुश होऊँगा ही.. जब मुझे खुशी और दुःख एक साथ नहीं होगा जब तुम्हारे आने से पहले तुम्हारे जाने की तिथि तय नहीं होगी। कभी तो ऐसा होगा जब तुम मुझे एक लंबी चिट्ठी लिखोगी.. और इसमें इतना प्यार लिखोगी कि मैं तुम्हें मिलने पर बस खा जाऊँगा.. अगर सुन रही हो तो लिखना, 'हॉं जरूर होगा'।

मेरे हज़ार शब्दों की चिट्ठी पर तुम्हारे एक शब्द भी भारी हो जाते हैं। 

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कल से बुखार से पीड़ित हूँ, आज ठीक हूँ, बुखार नहीं आया था, मगर देह तप रही है.. उसे तुम्हारा स्पर्श चाहिए। 

मैं जानता हूँ तुम भी ठीक नहीं हो.. मैं तुम्हारे आसपास रहना चाहता हूँ इन दिनों ताकि तुम्हारे लिए कुछ कर पाता, जंगली फूलों से तुम्हें ख़ुश करने का प्रयास करता, तुम्हारे बाल बांधता तुम्हारे हाथों में मेंहदी लगता.. तुम्हें ख़ूब हँसने का प्रयास करता मेरे यह सब करने पर तुम्हें जितना भी गुस्सा आता सब तुम मुझपर उतार लेती.. तुम्हारा सब बस मेरा है। 

मुझे याद आ रही है ... इन शब्दों के पीछे की भावनाओं से ज्यादा याद। 

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आज बचपन के सहपाठी ( चौथी कक्षा तक मेरे साथ पढ़ीं थीं उसी छप्पर वाले स्कूल में जिस जगह अब जंगल है, मैंने एक बार फ़ोटो दी थी तुम्हें ) का फोन आया था। उनकी अब एक 2 बरस की बेटी है। उनके पति ने उन्हें मेरी लिखी कविता सुनाई थी..वही जो मैंने तुम्हारे लिए लिखी थी। नाम और चेहरे से वह अंदाजा लगा पाई और फिर मामा की दुकान से मेरा नम्बर लेकर फोन किया था। तुम्हें पूछ रहीं थीं.. मैं नहीं कह पाया तुम्हारी तरह की नहीं कोई नहीं है, बता दिया, वो ख़ुश हुई बहुत। अभी कहीं लेखपाल के पद पर कार्यरत हैं। पति भी । प्रेम विवाह है दोनों लोगों से बात हुई ख़ूब खुशहाल हैं। ऐसे लोग बढ़ें यही प्रार्थना है। 

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दिन भर कुछ नहीं किया है 4 रोटी बनाकर खा लेने के सिवा। पढ़ाई न बराबर हुई है। कल सुबह से पढ़ूँगा। दो पेपर सॉल्व किया था। ख़ैर तुम तो जानती हो इन सबका कोई अर्थ नहीं है। 

पिताजी के स्वास्थ्य की चिंता बार बार मन में आ रही है, एक मन कहता है न जाऊँ घर, बुला कर दिखा दूँ , फिर डर भी लगता है ... मन इतना आगे पीछे क्यूँ सोचता है। 

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कल रात मुझे फिर वही सपना आया था.. ऊँचाई से गिरने वाला.. बच्ची की लिखी चिट्ठी पढ़ी रात में , पानी पिया, कमरे में कई चक्कर लगाए तो फिर सोया। 

जबसे आया  हूँ एक दिन बाहर गया था, अब हिम्मत नहीं। घर ही जाऊँगा। लौटूंगा जब तुम्हारे आकर जाने के दिन करीब होंगे। 

एक ग़ज़ल सुनी बहुत सुंदर थी। जगजीत जी अपनी पत्नी के साथ गा रहे थे, दोनों लोगों को साथ देखकर या सुनकर लगता है ये दोनों आवाजें एक दूसरे के लिए बी बनी थीं, और जब गाने के दौरान चित्रा जी उन्हें देखती हैं.. आह वह अवर्णनीय होता है। 

ग़ज़ल थी ― मेरे दिल में तू ही तू है दिल की दवा क्या करूँ 

कैफ़ी आज़मी की ग़ज़ल है। 

― 13 फरवरी 2025 / 7 : 30 शाम 

टिप्पणियाँ

  1. Bhgwan mahadev se yahi prarthana hai aapko wo jarur mile❤️❤️
    Man hota h apki chittiya bs padhte jaye❤️
    Bhut khubsurat ❤️

    जवाब देंहटाएं

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