दिनचर्या वैसी ही थी जैसी कोई सुनना नहीं चाहता। तो छोड़ देते हैं। नया कुछ नहीं हुआ। वही दौड़भाग वही थकन। ऊब घेरे रहती है। न चाह कर भी रह रहा हूँ यहाँ... कहाँ होना चाहता हूँ ? यह भी नहीं पता। शायद पता भी है। कहूँगा तो विश्वास नहीं होगा, इतने लोग भरे हैं पर मैं अकेले हूँ। पिछले दस दिनों से स्थिर होकर उतनी ही देर बैठता हूँ जितनी देर डायरी लेकर बैठता हूँ। आसपास क़रीबी ही क़रीबी हैं मगर सब इतने दूर की किसी को यह तक खबर नहीं कि मैं.. हूँ या कहाँ से दौड़ कर आ रहा। बहने न हो तो मैं सम्भव है भीड़ की तरह गिन लिया जाऊँ। गलती मेरी भी है, मैं व्यवस्था करके हट लेता हूँ। ख़ैर... उम्मीद साली।
मैं कुछ दिन को कहीं भाग जाना चाहता हूँ। लिखते ही ख़्याल आ रहा है पिछले तीन साल से यह वाक्य सैकड़ों बार तो लिख बोल चुका होंउँगा ही। कुछ अर्थ निकला ? कुछ भी नहीं। वही मजबूरी। वही औपचारिकता। वही रोना । वैसा ही इंतज़ार। वैसा ही परिणाम। असफलता की जिल्द पर जिल्द चढ़ती जा रही है। जीवन लगभग यथावत है। क्या मैं प्रयास नहीं कर रहा ? अगर नहीं कर रहा तो फिर तकलीफ क्यूँ है ? कर तो रहा हूँ। मेरी हर मेहनत निष्फल होती जा रही है। सभी जतन बेनतीजा हो जाते हैं। प्यार धिक्कार की सूरत ले लेता है। मैं किसी के लिए वैसा नहीं हूं जैसा कुछ लोग मेरे लिए हैं। पलटकर कोई कह सकता है आपको अपना दिखता है, इसीलिए खुद को कह रहे हैं, पर कर सब रहें हैं, सब झेल रहे हैं। अगर कर रहें हैं तो वह मुझतक क्यूँ नहीं पहुँच रहा। अरे राम राम राम ... मैं क्यूँ पागल हो रहा हूँ। यह अब क्यूँ कह रहा। यही तो जीवन है। क्यूँ उम्मीद कर रहा हूँ किसी से ? क्या किसी से भी नहीं करना चाहिए उम्मीद? नहीं मत बोलना वगरना जीवन में फिर बचेगा क्या, बिना उम्मीद तो जीवन मृतप्राय ही है। तो क्या मैं... नहीं! चुप रहो तुम यार
कल रात नींद नहीं आई। करवट बदलता रहा। जीवन की आवाज़ सुनता रहा। इंतज़ार करता रहा..!
सुबह जल्दी क्यूँ नहीं होती ..? तारीख़ जल्दी क्यूँ नहीं पलटती ?
मेरी झोली में ऐसे अनेक प्रश्न हैं जिनका मुझे जवाब चाहिए, मगर दिल सवाल बनाकर कहने से डरता है। अच्छा छोड़ते हैं। हँसते रहते हैं। सबसे एकदम गर्मजोशी से मिलते हैं, किसी ने नहीं कहना है कुछ मन का.. तेज और ताजी आवाज में बोलना है। अपने को अपनी तरह बिल्कुल नहीं देखना है वैसे देखना है जैसे लोग देखना चाहते हैं।
― 25 फरवरी 2025 / 7 बजे शाम
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें