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अतीत दर्शन



आज 6 घण्टे से ज्यादा जाम में फंसा रहा। साथ गए ड्राइवर का जीवन बड़ा फिल्मी सा था। वो दो भाई तीन बहनें हैं। पिताजी माता और दादा के साथ परिवार में कुल आठ लोग थे। जमीन जायदाद थी। कुछ भैंसे थी। इनका परिवार खोआ बेंचा करता था। पड़ोस में दो घर मुस्लिम थे। उनके कुल नौ लड़के हुए, और उससे ज्यादा लड़कियां। सारे लड़के बड़े हुए तो इनकी जमीन जबरन कब्जा करने लगे जिससे रंजिश शुरू हुई। उस रंजिश में इनके दादा का देहांत हुआ, सर पर लट्ठ लगने से, पिताजी को गोली मारी गई, उनके बड़े भाई का गला काटा गया, माँ यह सब देखकर हृदयाघात से मर गई। 

उस घटना के दौरान बहने और ये बुआ के घर गए थे जब यह सब हुआ। अब ये लोग घर से भागे रहते हैं। दो बहनों की शादी कर लिया है। एक बहन इंस्पेक्टर हो गई है। दूसरी पिछली साल बिहार में शिक्षक हुई। तीसरी पढ़ रही है। बिहार पुलिस हुआ था पर इनको छोड़कर वो जाने तैयार नहीं थी। ये नहीं पढ़े लिखे। जब यह सब घटना हुई थी तब ये 6वीं कक्षा में थे। बता रहे थे 8 साल पहले एक रात इन्होंने एक रिवाल्वर से उस घर के 3 सदस्यों की हत्या की और 2 लोग का गला रेत दिया। पुलिस इन्हें 2 साल खोजी, इनका इनकाउंटर हुआ खपराडीह के पास तीन लोगी लगी, दोनों जांघों में एक दाहिने हाथ में.. हाथ दिखाया भी गहरे घाव का निशान है। अब जमानत पर 2 साल से बाहर है तो अपनी बहन के घर ही रहते हैं। ड्राइवर का काम करते हैं। रास्ते में जाम में एक जगह एक पुलिस वाले से भिड़ गए। हम समझाए तो शांत हुए। मन के बड़े भावुक हैं, पर समय के लूटे हुए हैं। अतीत का पाप वर्तमान बिगाड़ देता है। आज उन्हें देखकर मिलकर बतिया कर मुझे पक्का हो गया। अपने कुछ कृत्यों पर पछतावा हुआ। मगर अब क्या कर सकता हूँ। सिवा स्वीकार करने के। 

और सब ठीक है। 

दवा खा लिया था तो कल रात लगभग 5 घण्टे सोया। तबियत में कुछ आराम है। दौड़भाग वैसे ही रही।

कुछ विशेष नहीं। सब वैसा का वैसा। वही नाटक नौटंकी। वही खाना खिलाना। दौड़ना थकना। गेहूँ में पानी लगाया था कल रात नींद लेकर उठने के बाद 3बजे के लगभग भर गया है। अब खाद डालनी है 4 दिन बाद।  इस बार मौसम इतनी जल्दी गर्म हो गया ही कि गेहूं सब बर्बाद हो जा रहा है। अतिविकास हमें गहरे विनाश की ओर धकेल रहा है।

हम झुलस कर, प्यास से तड़पकर मरेंगे। 

अभी बिस्तर पर बैठा हूँ। पूरे घर में यानि 15 कमरों 3 दलान और इतने बड़े दुआरे में मैं अकेले पड़ा हूँ। पड़ोस में भी कोई नहीं है। चिल्ला के रह जाऊँ तो कोई आवाज सुनने वाला भी नहीं है। 

खैर ठीक है। मम्मी भी ऐसे ही रहती हैं कुछ कुछ दिन। 

― 24 फरवरी 2025 / 9 : 30 रात 

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