घर एक व्यक्ति है ! यह पंक्ति पहली बार जिसने भी कहा उसकी अनुभूति क्षमता को नमन करने का मन करता है। कितनी बड़ी बात, कितनी बड़ी अनुभूति को बस चार शब्द में कह देना कितनी बड़ी उपलब्धि है।
प्रतीक्षा से उपजा घाव प्रतीक्षित व्यक्ति के एक स्पर्श मात्र से भर जाता है। जीवन आज जीवन की तरह महसूस हुआ। इससे ज्यादा क्या कहूँ ? और कैसे ? ख़ुशी को व्यक्त करने के लिए हमारे शब्दकोश सिमट जाते हैं। हम जीने में इतने तल्लीन होते हैं कि कोई गैप ही नहीं बन पाता जो बात हृदय से आगे मस्तिष्क तक जा पाए।
लग रहा है वातावरण में नमी बढ़ गयी है। मन कही सिमट जाने को है..मगर मन का जीवन तो पल भर का ही होता है न ! हम आज 34 दिन के बाद कुल 2 घण्टे 40 मिनट साथ रहे। घूमते रहे। दुनिया में हमारे भर की जगह कहाँ हैं और पल तो एक पल में बीत गया। अब जो है वह अगले ऐसे किसी पल का इंतज़ार है..
कुछ तारीखें सहेज लेने लायक होती हैं। सहेज़ लिया।
― आशुतोष प्रसिद्ध
27 दिसम्बर 2024 / 6: 15 शाम
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें