जब मन अस्थिर हो तो कलम भी स्थिर नहीं होती, शायद नहीं हो पाती, हिलती हुई मेज पर सीधा अक्षर नहीं लिखा जा सकता।
अजीब सी खीझ गुस्सा प्रेम सब भीतर दौड़ते रहे, मैं कुछ न कह सकने की अवस्था में हूँ न कर सकने के, मैंने पुकार कर देख लिया, मेरी पुकार एक दो वाक्य भर है या उसके भी नहीं।
कुछ नहीं किया सिवा बिस्तर पर पड़े रहने के अपनी इच्छाओं से जूझते रहने के
क्या मैं यूँ ही झेलने और रोने के लिए पैदा हुआ हूँ ..
― 27 oct 2025
😟😒
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