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मुझे माफ़ करना समय !!

जितना सुख मन का कह देने में है उससे कहीं अधिक सुख मन को दबा लेने में है। तत्कालिक रूप से कह देना भले ही सुखद हो,पर दीर्घ कालिक रूप से मन का मन में ही दबा लेना सुखद है। सुखद यूं है कि हमारे मन की पीड़ा से कोई और पीड़ित नहीं होता। खुद की पीड़ा से दूसरे को भर देना कहां तक उचित है? मुझे यह उचित नहीं लगता।

लेकिन यहीं एक सवाल भी उठता है कि ऐसा है तो फिर रिश्ते के मायने क्या हैं? जब मन का मन में ही रखना सुखद है तो क्यूं कहना किसी से कुछ, यह सुख ऐसे ही भोगा जाए बिना कहे, पर नहीं ! भोग भी तो अकेले का प्रयोजन नहीं है,कहना जरूरी ही है,और कहना ही एक मात्र विकल्प जिससे समझ आए, क्यूं नही कहना है। 

कुछ नहीं कहना भी कुछ कहना है, यह जानकारी कुछ कहकर नहीं मिल सकती है।

बहुत दिनों से डायरी से दूरी सी हो गयी है, ऐसा नहीं है की लिखता नहीं हूं, लिखता हूं, पर बस वही जो अति वैयक्तिक है उसके लिए... उसके लिए लिख देने भर से ही लगता है कुछ अच्छा रच दिया, लिखने की भूख कुछ क्षण को शांत हो जाती है। फिर जब लिखने की भूख जगती तो कलम उठाने का मन नहीं करता। दोहराव का डर लगता है। पर मजबूर होकर उठाता भी हूं तो उसकी ही बात लिखता हूं उससे ही बात करता हूं। जिसे साहित्य कहूं ऐसा कुछ नहीं है मेरे पास, बस उसकी बातों की पोटली है, उस एक स्त्री की बातों का जिससे मैं बोलना सीख रहा ,प्रेम सीख रहा समर्पण सीख रहा...

कोई कहे की मेरा पूरा का पूरा लेखन एक स्त्री के आसपास घूमते मेरे मौन की ध्वनि है,तो मै सर झुका कर स्वीकार करूंगा। 

स्वीकार कर लेने के पीछे मेरा स्वार्थ है। मै बेवजह शब्द नहीं खर्चना चाहता।

शब्दों को संभालने की बेहद जरूरत है, आज इस रफ्तार से शब्द फेंके जा रहे हैं, उतने मुश्किल है पहले कभी फेंके गए हों,आज की सदी को ज्यादा जरूरत है मौन रहने की , स्थिर रह कर लिखने की,पर अजीब यह है कि स्थिरता का साहित्य अस्थिर होकर नहीं लिखा जा सकता। जैसी जीवन जीते हुए मृत्यु का विचार किया जा सकता मृत्यु की अनुभूति नहीं, वैसे ही प्रेम में होते हुए प्रेम से इतर कुछ नहीं लिखा जा सकता है,लिखा जायेगा भी तो प्रेम के आसपास ही घूमता दिखेगा, हो सकता है लिखा जा भी सकता हो पर मै नहीं लिख सकता, मुझे उस स्त्री ने प्रेम से ऐसे भर दिया है कि कुछ और दिखता ही नहीं, प्रेम इतना सुंदर है की उस व्रत को धारण करते ही अ–सुंदर भी सुंदर दिखने लगता है। 

मुझे इन दिनों सब सुंदर ही दिखता है, दुःख भी, दूरी भी, चुप्पी भी, आरोप भी, इंतजार भी , और वह सब कुछ जो आप को असुंदर लग सकती है।

खामोश रहने के लिए मुझे माफ़ करना समय, मै प्रेम करने में व्यस्त हूं, समय का हिसाब तुम रखो, हम पढ़ने जरूर आएंगे...

शाम 6:40 ,8 अप्रैल,2023

 

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