बहुत लंबी कविता हो या कहानी बोझिल हो जाती है, भावनाओं को ज्ञान से पाट देना किसी विद्या में सत्यापित नहीं हो सकता। अगर ज्ञान देना है या कोई तर्कसंगत बात करनी है तो निबंध या या लेख रूप है कविता कहने या कहानी कहने की जरूरत क्या है ? मैं नहीं स्वीकार पाता। भावनाओं में तर्क कभी नहीं फिट हो सकता है। जहाँ होगा वहाँ भावना पीड़ित दमित होगी। ********* मर्द बर्फ का पहाड़ है जिसे प्रेम की गर्मी से ही पिघलाकर जल किया जा सकता है और किसी से नहीं। ******** दिन भर निगाह बार बार फोन पर ही रही। जाने क्या देखता अगोरता रहा। एक बात तो है.. इंतजार करने वाले को समय जितना बेहतर पता होता है उतना किसी को नहीं। आज ख़ूब सोया हूँ, दोपहर में भी सो ही रहा था, आज व्रत था तो कुछ खाने पीने की चिंता थी नहीं, बस सोकर दिन काटने का जतन किया। कमरे के सामान इधर उधर किया। कुछ पढ़ा। आज सातवें दिन बाहर कुछ दूर बाइक लेकर निकला। गमले में लगाये हुए पौधों में फूल आ रहे हैं, इन दिनों अडेनियम और गुलाब खिल रहा है, रातरानी का पौधा बहुत छोटा सा है फिर भी दो चार फूल रोज रहता है। आज हरश्रिंगार में कुछ न...