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अप्रैल, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वही जिसे कम सोचता हूँ ।

वो सभी लोग जिनके कई चेहरे थे, मैं उन सबको अपने एक चेहरे से देखने का आदी था। वो हर बार मुझे मूर्ख करार करते और निकल जाते। ज्यादातर उनके हर वाक्य के बाद मेरे पास विस्मयादिबोधक चिन्ह लगाने के अतिरिक्त कोई विकल्प न बचता। उसके बाद मैं ख़ोजता रहता, काश कोई ऐसा वाक्य पकड़ में आता जिसके बाद मैं पूर्णविराम लगा पाता और अपने को कुछ और सोचने में प्रवृत्त कर पाउँ .. पर यह सम्भव ही नहीं हो पाता। मैं हमेशा पूर्णविराम की खोज में रहा पर मुझे हमेशा मिला विस्मयादिबोधक चिन्ह ! ******** क्या मैं हर जगह बस फेल होने के लिए बना हूँ ? दिलासे के अतिरिक्त कोई लॉजिकल जवाब है जिसके बाद मैं बस स्थिर हो उस जवाब को क्रियान्वित करने की तरफ बढ़ता और कुछ समय बाद जवाब देने वाले को कह पाता.. 'शुक्रिया आपके जवाब ने मुझे ढ़ेरों सवालों से बचा लिया' दरअसल है ही ऐसा एक सही उत्तर हज़ारों प्रश्नों से हमें बचा लेता है। जैसे अभी मैं जिस प्रश्न का उत्तर खोज रहा हूँ वह ठीक ठीक नहीं मिल रहा है। जिस भी क्षण मिल जाएगा कलम ठहर जाएगी।  ******** हर दो लोग के बीच एक तीसरा आदमी है। जो पहले आदमी की असुरक्षा का कारण है। पहले आदमी की सोच मे...

आभास का अभ्यास

अकेले रहना हज़ार साँपों के बीच रहने जैसा है। सब कुछ है पर लगता है कुछ भी नहीं है। जिन चीजों के लिए उत्साह से भरा रहता था उनसब चीजों से विकर्षण और उब होती है। गुस्सा आता रहता है। सुबह उठकर घूमना शुरू कर दिया है। सही से खा पी रहा हूँ। सो भी जाता हूँ। पढ़ना भी हो रहा है। कुछ आर्थिक जरूरतों के लिए काम भी लिया है कर रहा हूँ। पर भीतर अजीब सी स्थिति रहती है। कुछ लिख नहीं पा रहा। दिन दिन भर कोई ऐसी आवाज से पाला नहीं पड़ता जिसके लिए जीवन जीना चाहता हूँ। सब मेरे लिए खड़े हैं। फिर भी न जाने क्या है जो बस है । शायद रचनात्मक बेचैनी इसे ही कहते हों। अगर मुझ जैसे कीड़े से आदमी में इतनी उथपुथल है तो जो रोज आदमियों को बना रहा, मार रहा है, दिन दिन अपना क्षरण देख कर भी सब दिए जा रहा है वह कितना बेचैन रहता होगा। ईश्वर बेचैनी का दूसरा नाम तो नहीं है ? उनकी पत्नियाँ उन्हें कैसे सही करती होंगी। उन्हें तो लगता हो न यह सब उनकी किसी कमी की वजह से है। यह सामान्य है हम जिससे प्यार करते हैं उसकी हर मानसिक स्थिति का दोषी खुद ही को मानने लगते हैं। हम बार बार पूछते हैं तुम ठीक तो हो न ? भले ही वो कुछ न बोले पर उस शांति को...