सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

दिसंबर, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

न चाहने की चाह में

जैसे कुछ अटक गया हो हलक में और मैं उसे कई जतन करके भी उगल नहीं पा रहा हूँ। कई कई दिनों की चुप्पी मुझपर इतनी चिपक गयी है कि मैं अब मुँह खोल रहा हूँ तब भी नहीं बोल पा रहा हूँ। सब कुछ उसी ढर्रे पर चल रहा है जैसे पिछले कई वर्षों से चलता चला आता है। रो कर सुख गई आँख आसुओं के खारेपन से कर्राए गाल पर एक पतली रेख सी खींच गई है। मैं उसे अपने फोन का फ्रंट कैमरा ऑन करके देख रहा हूँ और सोच रहा हूँ सरस्वती नदी ऐसे ही सूखी होगी।  जाने क्या है मेरी नियति में जहाँ जहाँ मैं अधिक जुड़ जाता हूँ वहीं पराए की तरह अपने को महसूस करने लगता हूँ, एक दिन यूँ ही बात करते हुए देवव्रत ने कहा " अब आपके पास अपनी भाषा है अपने बिम्ब है गहरी संवेदना है अब आप कुछ बड़ा लिखिए कुछ ऐसा जो बस आप लिख सकते हैं, आपके तरह की भावुकता और वैचैरिकी समकालीन किसी गद्यकार के गद्य में नहीं दिखती"  उस दिन से अपने से सवाल करता रहा, मैं क्या लिखना चाहता हूं ? और मुझे कोई जवाब ही नहीं मिलता, मैं उस दिन से एक शब्द नहीं लिख पाया, कहाँ मैं रोज लिखता था कमसे कम दो हज़ार शब्द तो रोज, वो इन दिनों दो सौ भी नहीं हो सके, मैं प्रयास करता तो शब्...

चक्कर ही चक्कर है दुनिया में

जीवन आवृत्ति के सिवा क्या है? हम जहाँ से ऊबकर थककर परेशान होकर भागते हैं फिर वहीं लौट आते हैं न चाहते हुए भी,  इस आवृत्ति में ही सब शामिल होता जाता है और हम भारी होते जाते हैं। हल्के हम मृत्यु से भी नहीं होते, मृत्यु हमें हल्कापन नहीं देती, आवृत्ति का बोझ उठाए चलते रहने से थकी देह को आराम देती है कि लो बैठ लो आगे फिर चलना है, इस आवृत्ति में मिला बोझ उठाकर ही..  अनन्त का जो चिन्ह है उसे कभी करीब से देखो तो कितना भयावह है वह, कोई ओर छोर ही नहीं..  कुछ शब्द बार बार मन में घूमते हैं, उन्हें लिख चुका हूँ, फिर उन्हें लिखना नहीं चाहता, अब उन्हें सोचना भी नहीं चाहता, फिर भी वो मेरा पीछा नहीं छोड़ते.. काश छोड़ देते !  कई सालों के कैलेंडर उठाकर देख लिया है, उसमें कोई ऐसी तारीख नहीं जिसमें मैं पूरा दिन सुख से जिया होउँ, चिंता, अपमान, ग्लानि, नाम की कोई रस्सी हर दिन मेरा गला कसती गई है। कसती गई है। धीरे धीरे मैं कसाव का आदी हो गया। अब मुझे कसाव और जकड़न में ही चलने की आदत है, स्वतंत्रता में चलने में बड़ा अजीब महसूस होता है।  जीवन के बीतते हर दिन के साथ मैं यह महसूस करता जा रहा ...